मौका देख कर चौका मार लिया

 
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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अजय है और मेरी उम्र 23 साल है, में इस समय लखनऊ में रहता हूँ. वैसे में दिखने में एकदम ठीक ठाक हूँ और मेरी लम्बाई 5 फिट 6 इंच है और मेरे लंड का साईज 6.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है और मुझे सेक्स करना शुरू से ही बहुत अच्छा लगता है और में कभी कभी अपने लंड को हिलाकर भी उसे शांत करता हूँ.

दोस्तों यह कहानी है मेरी भाभी की है, जिनका नाम गुड्डो है और उनकी उम्र 24 साल है, उनके फिगर का साईज 34-29-36 है और वो दिखने में बहुत ही सुंदर. उनका रंग दूध की तरह सफेद है और उनकी त्वचा ऐसी है कि छू लो तो हाथ फिसल जाए, एकदम मुलायम, चिकनी बिल्कुल गोरी, उन्हें देखकर में शुरू से ही इनकी तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित था. में मन ही मन उनको बहुत प्यार करने लगा था.

दोस्तों मेरे चचेरे भाई की शादी अभी करीब आठ महीने पहले ही हुई है और में उनकी शादी में उनके सभी कामों को करने के बाद अपने घर पर आ गया, लेकिन मेरा मन तो मेरी भाभी पर आ गया और में अब हर समय उनकी सुन्दरता और उनके वो बदन पर उभरे हुए बूब्स, गांड को सोच सोचकर मुठ मारने लगा और में उनके पास जाने, उन्हें छूने और चोदने के बारे में सोचने लगा, लेकिन अपनी पढ़ाई की वजह से में जा ना सका, लेकिन वो दिन आ ही गया और भगवान ने मेरी मन की बात सुन ली और फिर में उनके घर पर पहुंच गया.

दोस्तों यह घटना अभी कुछ दिन पहले की है जब में अपने गावं गया हुआ था, वहाँ पर जब भाभी को पूरे आठ महीने के बाद देखा तो वो अब और भी ज़्यादा सुंदर लग रही थी, उनका जिस्म अब पूरी तरह से भर चुका था और उनके बूब्स अब और भी ज्यादा उभरकर बाहर आ गये थे और उनकी गांड अब मुझे अपनी तरफ कुछ ज्यादा ही आकर्षित कर रही थी, शायद वो अपनी शादी के बाद अपनी सेक्स लाईफ में बहुत खुश थी, वो सब मुझे उनके गदराए हुए बदन से पता चल रहा था. फिर जब में वहां पर पहुंचा तो उन्होंने मेरा मुस्कुराकर स्वागत किया और में मन ही मन बहुत खुश हुआ. मुझे उनके जिस्म का यह रूप देखकर बहुत अच्छा लगा.

एक दिन वहां पर रुकने के बाद मेरे भाई को अचानक किसी जरूरी काम से एक हफ्ते के लिए शहर जाना पड़ा और अब घर पर में, मेरी भाभी और चाची जी थी, मेरे चाचा जी का कुछ साल पहले देहांत हो गया था तो इसलिए घर में सिर्फ अब तीन लोग थे, लेकिन अब भाई के अचानक से बाहर चले जाने की बात से मेरी भाभी थोड़ी उदास हो गई और फिर वो चला गया. अब रात को मेरी चाची जी खाना खाकर जल्दी ही सो गई तो में और भाभी अब एक साथ बैठकर टी.वी. देख रहे थे, लेकिन टी.वी. देखना तो मेरे लिए सिर्फ एक बहाना था.

मै तो चोरी छुपे उनके वो बड़े बड़े बूब्स को ताक रहा था और अपने लंड को गरम कर रहा था, शायद इस बात का अंदाजा मेरी भाभी को भी लग गया था, लेकिन फिर भी वो मुझसे कुछ नहीं बोली और फिर कुछ देर के बाद टी.वी. देखते देखते भाभी वहीं पर सो गई और मैंने देखा तो उनकी साड़ी का पल्लू उनकी छाती से पूरा नीचे सरक गया था और अब मुझे उनके ब्लाउज के अंदर से उनके बूब्स क्या सेक्सी लग रहे थे और अब मुझे उनके बूब्स के बीच की दरार भी साफ साफ दिख रही थे.

यह सब नजारा अपनी आखों के सामने अपने से कुछ दूरी पर देखकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया और पेंट में तंबू बन गया और में उन्हें देखकर बहुत जोश में आ गया. फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके अपना एक हाथ आगे बढ़ाया, लेकिन मेरी किस्मत उस समय कुछ खराब थी और मैंने देखा कि मेरे छूकर महसूस करने से पहले ही मेरी भाभी की आँख खुल गई.

मैंने तुरंत घबराकर अपना हाथ पीछे खींच लिया और एकदम सीधा होकर बैठ गया और टी.वी. देखने लगा, लेकिन उसी समय भाभी की नज़र मेरे तंबू पर पड़ गई और वो अब मेरे लंड को कुछ देर देखकर मेरी तरफ मुस्कुराकर मुझसे कहने लगी कि देवर जी अब आपके हावभाव को देखकर लगता है कि आपकी शादी हमे बहुत जल्दी करवानी पड़ेगी. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

फिर मैंने भी उनकी तरफ मुस्कुराकर मजाक में कहा कि हाँ जरुर करवा दो, क्या कोई लड़की है आपकी नजर में? फिर वो बोली कि बताओ आपको कैसी लड़की चाहिए? में बहुत जल्दी वैसी ही लड़की आपके सामने लाकर आपकी उससे शादी करवा दूंगी. फिर मैंने तुरंत उनसे कहा कि मुझे एकदम आपके जैसी लड़की चाहिए तो वो ज़ोर से हंसकर मुझसे धत कहकर सोने चली गई.

दोस्तों उन्होंने शायद मेरी उस बात को मजाक समझ लिया था और जब कि में उनसे उस रात को अपने दिल की सभी सच सच बातें कह चुका था और जिन्हें सुनकर वो अपने कमरे में चली गई, लेकिन में अब उनके कामुक जिस्म के बारे में सोचकर मुठ मारकर अपने लंड को ठंडा करके सो चुका था.

अगले दिन सुबह चाची पड़ोस में किसी की घर पर चली गई और वो भाभी को कहकर गई कि वो थोड़ा देरी से आएगी और जब में सोकर उठा तब मुझे भाभी ने यह बात बताई, जिसको सुनकर में मन ही मन बहुत खुश हुआ और मैंने अब सोच लिया कि आज में कैसे भी करके अपनी भाभी फंसाकर चोद ही लूँगा. घर पर अब सिर्फ़ में और भाभी अकेले थे.

में भाभी को अब बहुत घूर घूरकर देख रहा था और उन्होंने मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था, लेकिन फिर भी मुझसे उन्होंने कुछ नहीं कहा, शायद उनका मेरा इस तरह से उनके बूब्स को देखना उन्हें भी बहुत अच्छा लग रह था, अब वो भी मेरे सामने ज्यादा से ज्यादा झुक झुककर मुझे अपने बूब्स के दर्शन करवा रही थी और में मज़े लेता रहा और अपनी आखों से देखता रहा और कुछ देर बाद वो मुझसे मुस्कुराते हुए बोली.

भाभी : क्यों ऐसे मुझे घूर घूरकर क्या देख रहे हो, क्या मुझे खा जाने का इरादा है?
में : नहीं भाभी ऐसा कुछ भी नहीं है.

भाभी : नहीं कुछ तो है, लेकिन शायद तुम मुझे वो बताना नहीं चाहते?
में : नहीं बस वो तो ऐसे ही.

भाभी : मुझे ऐसा लगता है कि तुम अब ज्यादा बड़े हो गये हो.

फिर वो मुझसे इतना कहकर वहां से सीधा किचन में चली गई और में उनके बारे में सोचने लगा. फिर रात तक हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ, बस थोड़ा बहुत हंसी मजाक हुआ और फिर रात को खाना खाकर सब लोग अपने अपने रूम में सोने चले गये.

फिर मैंने भी अपनी भाभी को याद करके उनके बूब्स को सोचकर मुठ मारी और अब में भी थककर लेट गया, लेकिन मेरे लेटने के थोड़ी ही देर बाद मेरे कमरे का दरवाजा खुला देखा. फिर मैंने देखा कि दरवाजे पर भाभी खड़ी हुई थी और मेरे कहने पर वो अंदर चली आई और में भी अपने बेड पर उठकर बैठ गया और तभी भाभी मटकती हुई अंदर आई और अब मैंने उनसे पूछा.

में : क्यों भाभी क्या हुआ, आप अभी तक सोई नहीं?
भाभी : कुछ नहीं, वो मुझे जाने क्यों नींद नहीं आ रही तो मैंने सोचा कि में आपके पास चली जाऊँ.

में : हाँ वो तो आपने ठीक किया कि आप मेरे पास चली आई, लेकिन भाभी ऐसा क्यों और आपको अब तक नींद क्यों नहीं आ रही, आपकी तबियत तो ठीक है ना?
भाभी : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है और मेंरी तबियत एकदम ठीक है, वो तो मुझे बस तुम्हारे भैया की आज बहुत याद आ रही है तो में ना जाने क्यों आज उनकी बहुत कमी महसूस कर रही हूँ?
दोस्तों मेरा लंड अभी भी एक बार मुठ मारने के बाद भी तनकर खड़ा हुआ था और शायद भाभी ने इस बात पर गौर कर लिया और फिर वो मुझसे पूछने लगी.

भाभी : क्यों तुम्हारी क्या कोई गर्लफ्रेंड है?
में : नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, लेकिन आप मुझसे यह सब क्यों पूछ रही हो?

भाभी : नहीं वो तो में बस ऐसे ही पूछ रही थी, लेकिन तभी तो तुम ऐसे हो?
में : क्या? भाभी में आपके कहने का मतलब बिल्कुल भी नहीं समझा कि आपका इशारा किस तरफ है?

फिर अचानक से उन्होंने मेरा लंड को पेंट के ऊपर से पकड़कर मुस्कुराते हुए कहा कि तभी यह हर समय मुझे देखकर सलामी देता रहता है. दोस्तों में अब उनके मुहं से यह सभी बातें सुनकर एकदम चकित हो हो गया, क्योंकि मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि कभी भाभी खुद मुझसे यह सब भी कह सकती है, मुझे अपने कानों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होंने मुझसे यह कैसे कह दिया? में अब एकदम चुपचाप स्तब्ध होकर अपनी अचंभित नजर से उनकी तरफ देख रहा था, लेकिन में मन ही मन बहुत खुश था और फिर भाभी मुझसे बोली.

भाभी : देखूं तो आपका कितना लंबा है और बस इतना कहकर उन्होंने झट से मेरी पेंट को उतार दिया.
में : भाभी जी आप यह सब क्या कर रही हो?

भाभी : चुप साले पूरे दिन भर तो तू मुझे ऐसे घूरता है जैसे तो मुझे खा ही जाएगा और अभी एकदम सीधा बन रहा है.
में : हाँ भाभी खा तो में अभी भी जाऊँ आपको, लेकिन. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

भाभी : लेकिन क्या? तुझे रोका किसने है और में तो कब से तेरा इंतजार कर रही हूँ.
दोस्तों यह बात कहकर वो अब नीचे बैठकर अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे खड़े लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी. दोस्तों में तो अब सातवें असमान पर था और कुछ देर बाद मैंने उन्हें ऊपर उठाया और किस करने लगा. फिर मैंने उन्हें लगभग दस मिनट तक किस किया, लेकिन वाह दोस्तों उनके क्या मस्त गुलाबी, मुलायम, रसीले होंठ थे? मुझे उन्हें छूने से ही ऐसा लग रहा था कि जैसे मैंने कोई शहद भरा प्याला अपने मुहं से लगा लिया हो.

मैंने उनके होंठो को चूसा और फिर गर्दन को चूमने लगा, अब वो बिल्कुल मधहोश होकर उहमम्म्म आआहह उह्ह्ह्ह कर रही थी. तभी अचानक उन्होंने मुझे अपने से दूर हटाया और अब उन्होंने मेरी शर्ट को ज़ोर से झटका देकर सारे बटन तोड़ दिए और अब वो मेरी छाती पर किस करने लगी और मेरे निप्पल को भी चूसने लगी और अब मेरा लंड अंडरवियर फाड़कर बाहर निकलना चाहता था. में एक बार फिर से उन्हें नीचे लाया और अब में उनके ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो उन्होंने एकदम से मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि खोलो मत फाड़ डालो और अब मैंने भी ठीक वैसे ही किया जैसा उन्होंने मुझसे करने को कहा.

मैंने देखा कि उन्होंने अंदर काली कलर की ब्रा पहनी हुई थी और गोरे बदन पर वो काली कलर की ब्रा क्या मस्त लग रही थी? मैंने अब ब्रा के ऊपर से उनके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाए और अब में उन्हें चूसने लगा. मैंने उनकी निप्पल को चूस चूसकर एकदम लाल कर दिया और वो मेरे सर को अपने बूब्स पर ज़ोर से दबाने लगी. फिर मैंने कुछ देर बाद बूब्स को छोड़कर अब उनकी नाभि को किस करने लगा और मेरे यह सब करने से वो एकदम जोश में आकर मचलने लगी और तड़पने लगी.

तभी उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे प्यारे देवर जी अपनी भाभी को इस तरह इतना तड़पाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, प्लीज जल्दी से अपना वो मेरे अंदर डालकर मुझे एक बार त्रप्त कर दो और मेरी आग को ठंडा कर दो. दोस्तों उनके मुहं से यह शब्द सुनकर में अब और भी जोश में आ गया और मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने लंड को चूत पर रखकर धीरे से धक्का दिया और फिर मेरा लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया, में उन्हें ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और वो अब ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और मुझसे कहने लगी कि हाँ देवर जी और ज़ोर से हाँ और ज़ोर से दो मुझे हाँ और दम लगाकर चोदो, उह्ह्ह्हह्ह आईईईइ माँ उफफ्फ्फ्फ़ आज मेरी प्यास बुझा दो.

दोस्तों वो इतना कहते कहते एकदम से ठंडी हो गई, शायद वो झड़ चुकी थी और में लगातार धक्के देता रहा और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद में भी झड़ गया और मैंने अपना वीर्य उनकी चूत में डाल दिया और उनके ऊपर लेटा रहा. वो मेरे सर पर अपना एक हाथ घुमा रही थी और वो अपने दूसरे हाथ से मेरे लंड को सहला रही थी और मुझे उसके चेहरे से उसकी संतुष्टि साफ साफ नजर आ रही थी.

फिर कुछ देर बाद में उनके पास लेट गया और हम दोनों एक दूसरे के जिस्म पर अपने हाथ घुमा रहे थे. दोस्तों उस रात मैंने अपनी भाभी को चार बार चोदा, लेकिन उसके बाद जब तक भैया घर पर नहीं आए तब तक मैंने उन्हें कई बार चोदा और वो मेरी चुदाई से बहुत खुश थी. फिर भैया के आने के कुछ दिनों बाद में अपने घर पर चला आया, लेकिन अब भी हम जब कभी मिलते है तो मौका देखकर चुदाई के मज़े जरुर लेते है और वो भी हमेशा मेरा पूरा पूरा साथ देती थी और मेरे साथ बहुत मज़े करती है.



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